CBSE Menstrual Health: लड़कियों के स्वास्थ्य के लिए CBSE का नया कदम, स्कूलों में MHM सेंटर

CBSE ने स्कूलों में लड़कियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए MHM सेंटर बनाने का बड़ा आदेश दिया है। इसमें सैनिटरी नैपकिन, प्यूबर्टी एजुकेशन और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम शामिल होंगे।

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मार्च 21, 2026

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CBSE Menstrual Health: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर स्थापित करें। यह पहल भारत के सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद की गई है, जिसका उद्देश्य लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण प्रदान करना है।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उठाया कदम

सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी 2026 को स्पष्ट किया था कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता और सुविधाओं का उपलब्ध होना हर लड़की का मूलभूत अधिकार है। यदि स्कूलों में यह सुविधा नहीं होगी, तो इसका सीधा असर छात्राओं की पढ़ाई और आत्मविश्वास पर पड़ता है। CBSE ने इसी फैसले को ध्यान में रखते हुए स्कूलों को मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर बनाने का निर्देश दिया। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि छात्राओं को इस दौरान किसी भी तरह की परेशानी या असुविधा का सामना न करना पड़े।

मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर में क्या-क्या होगा

मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर में क्या-क्या होगा
मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर में क्या-क्या होगा

इन सेंटरों में छात्राओं के लिए कई जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

  • सैनिटरी नैपकिन: जरूरत पड़ने पर लड़कियां इन्हें आसानी से ले सकेंगी।
  • साफ-सफाई: केंद्रों में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
  • सुरक्षित निपटान: इस्तेमाल किए गए नैपकिन का सही तरीके से निपटान सुनिश्चित किया जाएगा।
  • MHM कॉर्नर: कुछ स्कूलों में स्वास्थ्य और प्यूबर्टी से जुड़ी जानकारी भी दी जाएगी।

इस तरह से यह केंद्र न केवल सुविधाएं उपलब्ध कराएगा बल्कि लड़कियों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक भी करेगा।

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जागरूकता और शिक्षा पर जोर

CBSE ने यह स्पष्ट किया कि सिर्फ सुविधाएं देना ही पर्याप्त नहीं है। स्कूलों को छात्रों को इस विषय पर जागरूक करना होगा। इसके लिए:

  • हेल्थ सेशन आयोजित किए जाएंगे।
  • प्यूबर्टी एजुकेशन पर चर्चा करवाई जाएगी।
  • जेंडर सेंसिटिविटी पर कार्यक्रम होंगे।

इन पहल का उद्देश्य छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाना और समाज में मासिक धर्म को लेकर बनी झिझक को कम करना है।

स्कूलों के लिए रिपोर्टिंग सिस्टम

स्कूलों के लिए रिपोर्टिंग सिस्टम
स्कूलों के लिए रिपोर्टिंग सिस्टम

CBSE ने एक रिपोर्टिंग सिस्टम भी लागू किया है। सभी स्कूलों को हर महीने अपनी तैयारियों और मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर की सुविधाओं के बारे में जानकारी देनी होगी।

  • पहली रिपोर्ट: 31 मार्च 2026 तक जमा करनी होगी।
  • दूसरी रिपोर्ट: 30 अप्रैल 2026 तक।
  • रिपोर्ट केवल आधिकारिक गूगल फॉर्म के जरिए स्वीकार की जाएगी।

इस प्रणाली से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी और स्कूलों की जिम्मेदारी सुनिश्चित होगी।

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लड़कियों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल

इस पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि स्कूलों में ऐसा वातावरण बने जहां लड़कियां बिना डर या शर्म के अपनी जरूरतों और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे में बात कर सकें। आज भी कई जगहों पर मासिक धर्म को लेकर झिझक बनी हुई है, लेकिन CBSE की यह पहल धीरे-धीरे इस सोच को बदलने में मदद करेगी और छात्राओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक स्कूल माहौल तैयार करेगी।

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