Malviya Nagar Fire: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर के ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ में हुई भीषण अग्निकांड की घटना ने न केवल राजधानी को दहला दिया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों की जान जाने के बाद जहां एक ओर जनता गहरे सदमे में है, वहीं दूसरी ओर राजनेताओं की उपस्थिति को लेकर भी बहस छिड़ गई है। घटना के 26 घंटे बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की, लेकिन उनके और अन्य वरिष्ठ नेताओं के घटनास्थल पर देर से पहुंचने या न पहुंचने को लेकर विपक्ष ने इसे असंवेदनशीलता (Insensitivity) करार दिया है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप
बताते चले कि, इस त्रासदी के बाद कांग्रेस नेता देवेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के घटनास्थल पर न पहुंचने को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। वहीं, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री प्रवेश वर्मा और आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेतृत्व—अरविंद केजरीवाल, आतिशी मार्लेना और सौरभ भारद्वाज—के घटनास्थल से दूरी बनाए रखने पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन नेताओं ने सोशल मीडिया पर दुख जरूर व्यक्त किया है, लेकिन धरातल पर उनकी उपस्थिति न होना जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने हालांकि होटल के खिलाफ सख्त जांच के आदेश दिए हैं, परंतु उनका दौरा न करना भी लोगों के बीच नाराजगी की वजह बना है।
राहत और बचाव कार्यों का लिया जायजा
तमाम आलोचनाओं के बीच, कुछ नेताओं ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने में तत्परता दिखाई। दिल्ली सरकार के गृह मंत्री आशीष सूद ने घटना के तुरंत बाद प्रभावित इलाके का दौरा किया और अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर सख्त जांच का भरोसा दिया। वहीं, मालवीय नगर के विधायक सतीश उपाध्याय और केंद्रीय मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायल पुलिसकर्मियों का हाल जाना। इसके अलावा, बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने भी घटनास्थल का मुआयना कर इस हादसे को अत्यंत दुखद बताया।
कांग्रेस और MCD की सक्रियता
विपक्ष में बैठी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने स्थानीय नेताओं के साथ मौके पर पहुंचकर पीड़ितों को ढांढस बंधाया। उन्होंने इस हादसे के लिए नगर निगम, फायर विभाग और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत (Administrative Collusion) को जिम्मेदार ठहराते हुए मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। वहीं, एमसीडी की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने आयुक्त के साथ घटनास्थल का दौरा किया। एमसीडी द्वारा की जा रही यह जांच अब यह तय करेगी कि क्या वास्तव में सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर होटल का संचालन किया जा रहा था।
प्रशासन की लापरवाही पर उठ रहे बड़े सवाल
इस अग्निकांड ने दिल्ली के सुरक्षा तंत्र (Security Infrastructure) की पोल खोल दी है। जनता का मानना है कि किसी भी बड़े हादसे के बाद राजनेताओं का घटनास्थल पर पहुंचना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि पीड़ितों के प्रति उनकी गंभीरता का प्रमाण होता है। 21 लोगों की असमय मृत्यु ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब यह देखना होगा कि क्या प्रशासन केवल जांच के आदेश देकर औपचारिकता पूरी करेगा या फिर उन अधिकारियों और भवन संचालकों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी जिनकी लापरवाही ने 21 लोगों की जान ली है।










